Food Inflation Decline in India से राहत, आर्थिक विकास को मिल सकती है नई रफ्तार, खाद्य मुद्रास्फीति यानी Food Inflation Decline in India से इस समय भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलती दिखाई दे रही है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में औसत मुद्रास्फीति दर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अनुमान बुधवार को जारी की गई CareEdge Ratings Report में सामने आया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विकास दर सुस्त पड़ती है, तो मौजूदा मुद्रास्फीति के आंकड़े RBI को Rate Cut की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति में हाल की गिरावट मुख्य रूप से आपूर्ति में सुधार, मांग में सीमित वृद्धि और मौसम की स्थिरता की वजह से आई है। इससे सामान्य उपभोक्ताओं को राहत तो मिली ही है, साथ ही सरकार की नीतिगत स्थिरता पर भी सकारात्मक असर पड़ा है।
India Economy Forecast और Food Inflation Decline in India के बीच संबंध
CareEdge Ratings के मुताबिक, आर्थिक दृष्टि से भारत फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति में है। कमजोर US Dollar, मजबूत Chinese Yuan, नियंत्रित Current Account Deficit (CAD) और India-US Trade Deal से जुड़ी उम्मीदों ने इस स्थिरता में योगदान दिया है।
एजेंसी ने वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक Dollar-Rupee Exchange Rate का अनुमान ₹85 से ₹87 के बीच बनाए रखा है। इसका मतलब है कि विदेशी मुद्रा दरों में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे भारत के आयात-निर्यात व्यापार पर संतुलित असर पड़ेगा।
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Global Trade Volume 2025-26 में औसतन 2.9 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। यह वैश्विक व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत है और भारतीय अर्थव्यवस्था को भी इसका लाभ मिल सकता है।
IMF Report India: Food Inflation Decline के बावजूद निर्यात में गिरावट की संभावना
International Monetary Fund (IMF) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा है कि भारत का वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात, जो वर्तमान में GDP का लगभग 21 प्रतिशत है, 2030 तक घटकर 16 प्रतिशत रह सकता है।
इस अनुमान के पीछे वैश्विक मांग में कमी, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि और उच्च उत्पादन लागत जैसी चुनौतियों को जिम्मेदार माना गया है।
हालांकि, Food Inflation Decline in India से घरेलू स्तर पर उपभोग क्षमता में सुधार हुआ है। IMF का मानना है कि यदि यह स्थिरता बनी रहती है, तो घरेलू बाजार मजबूत होगा, जिससे समग्र आर्थिक संतुलन बरकरार रखा जा सकेगा। साथ ही, 2025 के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर को भी 20 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ाया गया है, जो आने वाले समय में भारत के लिए अनुकूल माहौल बना सकता है।
Non-Petroleum Export Growth और Food Inflation Decline in India का असर
लगातार जारी वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत ने अपने Non-Petroleum Export क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में Non-Petroleum Export में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि Non-Petroleum Goods Import में 4.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
यह स्थिति दर्शाती है कि घरेलू मांग धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। Food Inflation Decline in India की वजह से उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक खर्च योग्य आय (Disposable Income) बची है, जिससे बाजार में खपत बढ़ी है।
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में गिरावट जरूर आई है, लेकिन अन्य श्रेणियों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और केमिकल्स में स्थिरता बनी हुई है।
India Export to USA और Food Inflation Decline in India से जुड़ा वैश्विक प्रभाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में India Export to USA में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन गया है, जिसकी हिस्सेदारी भारत के कुल निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत है।
हालांकि, सितंबर महीने में इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों को छोड़कर अमेरिका को भारत के कुल निर्यात में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि Food Inflation Decline in India के चलते उत्पादन लागत में कमी आई है, जिससे भारतीय कंपनियाँ विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रख पा रही हैं।
RBI Rate Cut और Food Inflation Decline in India से जुड़ी मौद्रिक नीति
CareEdge Ratings Report में कहा गया है कि अगर आगामी तिमाही में आर्थिक वृद्धि धीमी रहती है और मुद्रास्फीति के स्तर निम्न बने रहते हैं, तो RBI ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर सकता है।
Food Inflation Decline in India से उपभोक्ता मांग और उद्योगों दोनों को राहत मिल रही है, जिससे निवेश बढ़ने की संभावना है।
ब्याज दरों में संभावित कमी से ऋण लेने की लागत घटेगी, जिससे छोटे उद्योगों और घरेलू निवेश को बल मिलेगा। यह स्थिति रोजगार और उत्पादन दोनों में सुधार ला सकती है।
Food Inflation Decline in India से मिली स्थिरता, पर वैश्विक चुनौतियाँ बरकरार
कुल मिलाकर, Food Inflation Decline in India भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक राहतभरी खबर है। इससे न केवल आम उपभोक्ता को राहत मिली है, बल्कि निवेशकों और उद्योगों का भरोसा भी बढ़ा है।
हालांकि, वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव, IMF Report India में जताई गई निर्यात संबंधी चिंताएँ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं।
फिर भी, नियंत्रित मुद्रास्फीति, स्थिर विदेशी विनिमय दर और घरेलू खपत में वृद्धि के चलते यह कहा जा सकता है कि आने वाले महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था एक स्थिर मार्ग पर आगे बढ़ेगी।















